tag:blogger.com,1999:blog-21658146.post114019691629707808..comments2008-05-01T13:15:22.943+05:30Comments on Srijan Shilpi: भारत में ग्रामीण पत्रकारिता का वर्तमान स्वरूपSrijan Shilpinoreply@blogger.comBlogger3125tag:blogger.com,1999:blog-21658146.post-38739266619816840332007-10-27T15:56:00.000+05:302007-10-27T15:56:00.000+05:30ग्रामीण विषयों पर आधारित पत्रिका है, सोपान स्टेप क...ग्रामीण विषयों पर आधारित पत्रिका है, सोपान स्टेप कभी देखिय. विश्वास है आपको पसन्द आयेगी. बजार मे ना मिलने की स्थिति मे, चाहे तो मुझे फोन भी कर सकते हैं.- 09868419453आशीष कुमार 'अंशु'http://www.blogger.com/profile/12024916196334773939noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-21658146.post-50648025608619536452007-10-27T15:55:00.000+05:302007-10-27T15:55:00.000+05:30ग्रामीण विषयों पर आधारित पत्रिका है, सोपान स्टेप क...ग्रामीण विषयों पर आधारित पत्रिका है, सोपान स्टेप कभी देखिय. विश्वास है आपको पसन्द आयेगी. बजार मे ना मिलने की स्थिति मे, चाहे तो मुझे फोन भी कर सकते हैं.- 09868419453आशीष कुमार 'अंशु'http://www.blogger.com/profile/12024916196334773939noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-21658146.post-1140426005750430312006-02-20T14:30:00.000+05:302006-02-20T14:30:00.000+05:30ग्रामीण पत्रकारिता पर आपके विचार अत्यन्त सारगर्भित...ग्रामीण पत्रकारिता पर आपके विचार अत्यन्त सारगर्भित हैं | स्वतन्त्र भारत में व्यवस्था ही कुछ ऐसी बनायी गयी है कि कोई शहरी तो गाँव की तरफ मुह करने की बात कभी सोच ही नही सकता , कोई ग्राम-वासी थोडा-बहुत पढ-लिख कर तथाकथित होशियार हो जाता है तो सबसे पहला काम गाँव से बिमुख होने का ही करता है | मैं आपकी बात से सहमत हूँ कि संचार-क्रन्ति के इस युग में दुनिया से कटे ये भारतीय गाँव अपने दुर्दिन के अन्त का अनुनाद सिंहhttp://www.blogger.com/profile/05634421007709892634noreply@blogger.com