tag:blogger.com,1999:blog-21658146.post-1140528276516640362006-02-21T18:54:00.000+05:302006-02-21T18:54:00.000+05:30आप बाजार की शक्ति को "राक्षसी-शक्ति" की भाँति समझक...आप बाजार की शक्ति को "राक्षसी-शक्ति" की भाँति समझकर उसे अनादृत क्यों कर रहे हैं ? क्या वह "दैवी-शक्ति" की तरह पवित्र माने जाने की हकदार सिद्ध नही हो चुकी है ?अनुनादअनुनाद सिंहhttp://www.blogger.com/profile/05634421007709892634noreply@blogger.com