tag:blogger.com,1999:blog-21658146.post114460756743476490..comments2007-03-18T20:05:51.547+05:30Comments on Srijan Shilpi: पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण पर बहसSrijan Shilpinoreply@blogger.comBlogger9125tag:blogger.com,1999:blog-21658146.post-1144782051937973262006-04-12T00:30:00.000+05:302006-04-12T00:30:00.000+05:30आरक्षण पर बहस में शामिल होने के लिए आप सभी साथियों...आरक्षण पर बहस में शामिल होने के लिए आप सभी साथियों को धन्यवाद। तेज प्रताप भाई, आप जीतू जी की चुनौती स्वीकार कर ही डालिए। एक साथी ने अज्ञात रहकर अपनी टिप्पणी दी है। क्यों भई, एक संवैधानिक मुद्दे पर बहस में प्रकट भाव से शामिल होने में संकोच तो नहीं करनी चाहिए! समाचार चैनलों और समाचार पत्रों में तो ऊँची जातियों का वर्चस्व है, वे आपको अपनी बात अपने माध्यम पर रखने नहीं देंगे। कम से कम ब्लॉग जैसे Srijan Shilpihttp://www.blogger.com/profile/09572653139404767167noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-21658146.post-1144769507946187542006-04-11T21:01:00.000+05:302006-04-11T21:01:00.000+05:30तेज प्रताप,जाहिर है ये आपका असली नाम नही है, तभी त...तेज प्रताप,जाहिर है ये आपका असली नाम नही है, तभी तो आप अपने ब्लॉग/पता बताने की हिम्मत नही जुटा पाए।रही बात विशेष योग्यता की, तो भैया, आप कोई आसमान से तो उतरे नही हो। उतरे हो क्या? ये खामियां/बुराईयां उच्च और पिछले वर्ग दोनों मे समान रुप से फ़ैली हुई हैं। पथ मे मत भटको,बहस करनी है तो आरक्षण के मुद्दे पर करो। इधर उधर की बात मत करो।Jitendra Chaudharyhttp://www.blogger.com/profile/09573786385391773022noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-21658146.post-1144754784737060092006-04-11T16:56:00.000+05:302006-04-11T16:56:00.000+05:30आशीष भाई, आप ठीक कहते हैं | उच्च वर्ग के लोगों में...आशीष भाई, आप ठीक कहते हैं | उच्च वर्ग के लोगों में एक "विशेष-योग्यता" होती है - भ्रष्टाचार, पक्षपात और भाई-भतीजा-वाद करने की | इसी विशेष योग्यता के बल पर वे सब जगह "छाये" हुए हैं | पर अब भारत की बहुसंख्यक जनता को उनकी ये "विशेष योग्यता" समझ में आ गयी है | तभी तो वे खुद अपना रास्ता बनाने लगे हैं |Tej Pratapnoreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-21658146.post-1144752531618213512006-04-11T16:18:00.000+05:302006-04-11T16:18:00.000+05:30वशिष्ठ और विश्वामित्र के बीच आजीवन यही सिद्ध करने ...वशिष्ठ और विश्वामित्र के बीच आजीवन यही सिद्ध करने के लिए संघर्ष चलता रहा कि ब्राह्मण और क्षत्रिय में से श्रेष्ठ कौन है।वशिष्ठ और विश्वामित्र के बीच का विवाद नंदनी को लेकर था न कि जातीय श्रेष्ठता सिद्ध करने के लिए। नंदनी वशिष्ठ के पास थी और विश्वामित्र उसे पाना चाहते थे जिस कारण उन्होने अपना राज-पाट त्याग संन्यास ले तप की राह पकड़ी थी।परशुराम ने तो धरती को क्षत्रिय-विहीन कर देने की शपथ ले रखी थी औरAmithttp://www.amitgupta.in/noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-21658146.post-1144752227146637812006-04-11T16:13:00.000+05:302006-04-11T16:13:00.000+05:30सृजन शिल्पी, आप शायद अभी भी पुरातन काम में ही जी र...सृजन शिल्पी, आप शायद अभी भी पुरातन काम में ही जी रहे हैं।बेअदबी के लिये माफ़ी चाहूँगा, लेकिन आपसे निवेदन करूंगा कि वक्त की सच्चाई को स्वीकार करिए।यदि आरक्षण पचास साल मे कुछ नही कर सका तो आगे क्या गारंटी है। आपने तथ्यों को तोड़ मरोड़ कर पेश किया है,घटनाओं को अन्य परिवेश मे जोड़कर दिखाया है, ये खेल घृणित खेल तो राजनेता करते है, आप कहाँ से पड़ गये इसमे? अभी भी समय है, पिछड़ा समाज जागे, कन्धे से कन्धा Jitendra Chaudharyhttp://www.blogger.com/profile/09573786385391773022noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-21658146.post-1144751298213157812006-04-11T15:58:00.000+05:302006-04-11T15:58:00.000+05:30ये महानुभाव लोग भी अपने पुरखों की तरह मानकर चल रहे...ये महानुभाव लोग भी अपने पुरखों की तरह मानकर चल रहे हैं कि प्रतिभा ऊँची जाति के साधन-सत्ता संपन्न लोगों की बपौती होती है जो केवल उन्हें ही जन्मजात मिलती है। जी हां सही कहा आपने प्रतिभा ऊँची जाति की बपौती नही हैं, इसका मतलब यह भी नही है कि आप योग्यता ना रखते हुये अपनी जाति विशेष के कारण योग्य लोगो को टंगडी मारे ।आशीषhttp://ashish.net.in/khalipilinoreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-21658146.post-1144749989968383592006-04-11T15:36:00.000+05:302006-04-11T15:36:00.000+05:30आपने विषय को बहुत ही तर्कपूर्ण ढंग से रखा है | जो ...आपने विषय को बहुत ही तर्कपूर्ण ढंग से रखा है | जो लोग आज प्रतिभा की बात कर रहे हैं , उनकी प्रतिभा गत एक हजार वर्षों तक क्यों सो रही थी ? क्यों छोटे से यूरोप में हजारों वैज्ञानिक, इंजीनियर, गणितज्ञ, समाजशास्त्री, अर्थशास्त्री, स्टेट्समैन, कूटनीतिज्ञ, कानूनविद, भाषाविद, और महानायक पैदा हुए ; जबकि भारत में इनका सर्वथा अकाल बना रहा ?Anonymousnoreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-21658146.post-1144749475920565332006-04-11T15:27:00.000+05:302006-04-11T15:27:00.000+05:30सबसे पहले मै लेख मे उल्लेखीत कुछ भ्रांतिजनक तथ्यो ...सबसे पहले मै लेख मे उल्लेखीत कुछ भ्रांतिजनक तथ्यो की तरफ ध्यान दिलाना चाहुंगा।"वशिष्ठ और विश्वामित्र के बीच आजीवन यही सिद्ध करने के लिए संघर्ष चलता रहा कि ब्राह्मण और क्षत्रिय में से श्रेष्ठ कौन है।"वशिष्ठ और विश्वामित्र के बीच मे टकराव ब्राम्हण और क्षत्रीय का नही, अहम और वर्चश्व का था। मत भूलिये इस टकराव का प्रारंभ "कामधेनु" से हुवा था। विश्वामित्र उसे जनकल्याण के लिये उपयोग करना चाहते थे, लेकिनआशीषhttp://ashish.net.in/khalipilinoreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-21658146.post-1144748666988441202006-04-11T15:14:00.000+05:302006-04-11T15:14:00.000+05:30Aap konse duniya mein ho??? Ye aarakshan se kuch n...Aap konse duniya mein ho??? Ye aarakshan se kuch nahi hoga... Jo log mehnat se padhte hai oon logon par tau yeh sarasar julm hai... Mera ek dost jisne din raat ek kar 87% paaya aur doosra dost jo OBC tha wo aisho aaram se reh kar itni mehnat na kar oose 55% mila... Phir jab Admission ka daur shuru hua tau mera dost jise 87% mile they... oose admission nahi mili... Aur je janab bina kuch kiye Sachin Suryawanshihttp://www.blogger.com/profile/17331344423439892408noreply@blogger.com