tag:blogger.com,1999:blog-21658146.post115090811545435005..comments2007-03-18T20:05:52.802+05:30Comments on Srijan Shilpi: अर्धनारीश्वर और वाणभट्ट की आत्मकथाSrijan Shilpinoreply@blogger.comBlogger4125tag:blogger.com,1999:blog-21658146.post-1160127409416328462006-10-06T15:06:00.000+05:302006-10-06T15:06:00.000+05:30बाणभट्ट की आत्मकथा का मूल दर्शन अथवा सार तत्व है :...बाणभट्ट की आत्मकथा का मूल दर्शन अथवा सार तत्व है : जीवन जीने के किए है . प्रेम जिस रूप में भी आये उसका बाहें फ़ैला कर स्वागत होना चाहिए . कितना भी अभावमय और संघर्षमय क्यों न हो, जीवन है तो उसे बेहतर बनाने की संभावनाएं भी हैं.प्रियंकरhttp://anahadnaad.wordpress.comnoreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-21658146.post-1151069694702120112006-06-23T19:04:00.000+05:302006-06-23T19:04:00.000+05:30बहुत सुन्दर। इन्टर्नेट की भीड मे ऐसा लेख पढना अच्छ...बहुत सुन्दर। इन्टर्नेट की भीड मे ऐसा लेख पढना अच्छा लगा, सोचने पर मजबूर किया, और लिखते रहिये।--हिमान्शु शर्माhemanshowhttp://www.blogger.com/profile/12793312854612212185noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-21658146.post-1150954295249428742006-06-22T11:01:00.000+05:302006-06-22T11:01:00.000+05:30बात गहरी है और सत्य । इस सोच से प्रेरित होकर कुछ ल...बात गहरी है और सत्य । इस सोच से प्रेरित होकर कुछ लिख रही हूँ कल तक अपने ब्लाग पर पोस्ट करूगीं । आशा है पसंद आएगा ।ratnahttp://soniratnablogspot.comnoreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-21658146.post-1150953118557171502006-06-22T10:41:00.000+05:302006-06-22T10:41:00.000+05:30पढ़ कर बहुत अच्छा लगा. यह नहीं कह सकता कि पूरा समझ ...पढ़ कर बहुत अच्छा लगा. यह नहीं कह सकता कि पूरा समझ आ गया, शायद उसके लिए पूरा उपन्यास पढ़ना पड़ेगा. इतना अवश्य स्पष्ट है कि बात गहरी है और मनन की आवश्यकता है. अगर आप इस दर्शन की व्याख्या करें तो और भी अच्छा होगा. बहुत बहुत धन्यवाद.Sunil Deepakhttp://www.blogger.com/profile/05781674474022699458noreply@blogger.com