tag:blogger.com,1999:blog-21658146.post-1142193854056423372006-03-13T01:31:00.000+05:302006-06-03T16:31:46.700+05:30समीक्षा: 'शब्दभंग' (मारीशस का हिन्दी उपन्यास)व्यवस्था में व्याप्त भ्रष्टाचार से लड़ने की आदर्शवादी चाह और साथ ही व्यक्तिगत जीवन में उन्नति के सोपान चढ़ने व अपने प्रियजनों के लिए सुख-सुविधा हासिल करने की महत्वाकांक्षा के द्वंद्व के कारण जिंदगी किस तरह बीहड़ और खतरनाक परिस्थितियों में उलझ जाती है और कई बार तमाम संघर्ष व कष्ट के बाद भी अंतत: हार और हताशा ही हाथ लगती है, इस कथानक को समकालीन दौर के साहित्य, रंगमंच व फिल्म में कई बार अपने-अपने Srijan Shilpinoreply@blogger.com