tag:blogger.com,1999:blog-21658146.post-1142620544947969322006-03-18T00:00:00.000+05:302006-03-18T00:20:13.280+05:30बढ़ जाओ आगे तुमबढ़ जाओ आगे तुम मैंने राह छोड़ दी है तुम्हारे लिए नहीं, हारा नहीं हूँ मैं पर मैं तुमसे लड़ा ही कब था मैंने लड़ना-भिड़ना छोड़ दिया है तुम इसे कायरता या पलायन मानते हो तो मानते रहो पर यह तुम भी जानते हो कि मैं वास्तव में क्या हूँ मेरे काम स्वयं ही प्रमाण हैं मेरी क्षमताओं के नहीं जरूरत है किसी सर्टिफ़िकेट की उसे। तुम तो कर्ण को भी अर्धरथी ही कहोगे सुभाष की जीत को तुम अपनी हार मान लोगे तुम जैसे लोगSrijan Shilpinoreply@blogger.com