tag:blogger.com,1999:blog-21658146.post-1144516965472355942006-04-08T22:47:00.000+05:302006-04-08T23:25:05.236+05:30नसीहतें कोई आदमी इतना बुरा नहीं होता कि<?xml:namespace prefix = o ns = "urn:schemas-microsoft-com:office:office" />अपनी गलती का अहसास कभी कर न सके।वहम का कोई जाल इतना सघन नहीं होता किउसको काटकर ग़लतफ़हमी दूर न की जा सके।’कोई जख्म इतना गहरा नहीं होता किवक्त के साथ भर न जाए। कोई फासला इतना बड़ा नहीं होता किउसको तय कर करीब न आया जा सके।कोई मुश्किल ऐसी नहीं होती किकोशिशों से आसान न बन जाए।कोई मंजिल इतनी दूरSrijan Shilpinoreply@blogger.com