tag:blogger.com,1999:blog-21658146.post-1144607567434764902006-04-09T23:55:00.000+05:302006-06-03T16:27:57.760+05:30पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण पर बहसवर्चस्व और प्रतिरोध की पृष्ठभूमि समाज में शांति, सौहार्द और समरसता स्थापित करने के लिए समानता और स्वतंत्रता को सुनिश्चित करना अनिवार्य है। लेकिन भारतीय समाज में समानता और स्वतंत्रता कभी वास्तविकता नहीं रही। पुरातन काल से ही हमारे यहाँ व्यक्ति को समाज की स्वतंत्र इकाई के रूप में देखने के बजाय उन्हें जाति और वर्ण व्यवस्था के दायरे में आबद्ध माना जाता रहा। वर्ण-व्यवस्था का सूत्रपात करते समय भले ही Srijan Shilpinoreply@blogger.com