Saturday, March 18, 2006

इंतजार

कब से इंतजार कर रहा हूँ मैं

कि तुम उतरो मेरे आँगन में

और मेरे हाथों में हाथ डालकर

मेरे साथ नाचो, गाओ, झूमो

देखो, मैं कितना खुश हूँ

पर खुशी को अकेले तो भोगा नहीं जा सकता

तुम भी आओ मेरे साथ

मेरी खुशियों के सहभागी बनो

तुम आओगे तो मैं यह भी भूल जाऊँगा कि

मैं किसी कारण से खुश था

मैं तो तुम्हारे आने की खुशी में ही पागल हो जाऊँगा

तुम्हारे आने की खुशी से बढ़कर और खुशी क्या होगी

तुम आ जाओ दोस्त मेरे

मैं तुम्हारा इंतजार कर रहा हूँ।

4 comments:

pragya said...

life is waiting.Its a long wait for happiness, loved ones,a wish to come true,to go home,to attain the impossible, to attain nirvana ,this or that.

अभिनव said...

अच्छी कविता है।
शुभकामनाएँ

Anonymous said...
This comment has been removed by a blog administrator.
Anonymous said...

बहुत मनमोहक कविता है,लिखते रहिये